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Channel: महात्मा गाँधी
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भारतीयों के हाथ ही काफी हैं : गाँधी

वह भारत का सुनहरा दौर था, लेकिन जल्द ही वक्त की बुरी नजर इस प्यारे देश को लग गई। वर्ष 1600 में जब ग्रेट ब्रिटेन के नाविकों ने भारत का रुख किया, उस समय सचमुच यह देश सोने की चिड़िया हुआ करता था।

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गाँधी के जीवन में उपेक्षित अध्याय प्राणजीवन मेहता

महात्मा गाँधी का व्यक्तित्व हजारों लाखों के लिए प्रेरणास्रोत है लेकिन उनके जीवन के कई महत्वपूर्ण मौकों पर उन्हें सही निर्णय लेने में मदद करने वाले और देश की आजादी के मार्ग पर पूरी ताकत से आगे बढ़ने की

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डाक टिकटों में मोहन से महात्मा तक का सफर

बहुत कम लोगों को पता होगा कि भारत को गुलामी के शिकंजे में कसने वाले ब्रिटेन ने जब पहली दफा किसी महापुरुष पर डाक टिकट निकाला तो वह महात्मा गाँधी ही थे।

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गाँधी और गुरुदेव के बीच हास परिहास

एक दूसरे का बेहद सम्मान करने वाले महात्मा गाँधी और गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के आपसी संबंधों का एक दिलचस्प पहलू वे मजेदार टिप्पणियाँ हैं जिसमें इन दो महान विभूतियों के उच्च हास्यबोध के...

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पिता ही नहीं माँ भी थे बापू

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के वैसे तो अपने चार पुत्र थे लेकिन वे तमाम भारतीयों को अपनी मानस संतान के तौर पर देखते थे। फिर भी उन्होंने अंतिम दिनों में अपने साथ रही मनुबेन गाँधी का

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